पीएम आवास योजना ग्रामीण में किस्त अक्सर जियो-टैग फोटो न चढ़ने से अटकती है, यहां जानें असली वजह और समाधान।
[VERIFY] लिस्ट:
- पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के लिए सहायता राशि ₹1.30 लाख है या बढ़कर ₹2 लाख हो गई है, यह सिर्फ एक सोर्स पर मिला, दो और सोर्स पुराना ₹1.30 लाख वाला अमाउंट ही बता रहे हैं
- जियो-टैग फोटो खुद लाभार्थी अपलोड कर सकता है या सिर्फ ग्राम विकास अधिकारी/रोज़गार सहायक ही अपलोड करते हैं, अलग-अलग सोर्स में अलग-अलग जानकारी मिली
- हर स्टेज पर निर्माण कितने प्रतिशत पूरा होना चाहिए, यह कहीं सटीक आंकड़े में नहीं मिला, सिर्फ “नींव”, “लिंटल”, “छत” जैसे सामान्य शब्दों में बताया गया है
जो नहीं खुला: pmayg.nic.in का official पेज सीधे नहीं खुल पाया, सिर्फ उसका हवाला देने वाले सेकेंडरी सोर्स मिले। अगर तुम्हारे पास pmayg.nic.in या AwaasSoft पोर्टल का कोई official सर्कुलर या स्क्रीनशॉट है, तो ऊपर के तीनों [VERIFY] पॉइंट पक्के हो जाएंगे।
नींव खुदवाई, पहली किस्त भी आ गई, दीवारें भी उठा दीं, फिर महीनों तक दूसरी किस्त का कहीं पता नहीं। गांव में यह शिकायत हर दूसरे घर से सुनने को मिलती है। लोग सोचते हैं कि कहीं फाइल में गड़बड़ी हो गई, या अफसर जानबूझकर रोक रहे हैं। ज़्यादातर मामलों में वजह इतनी बड़ी नहीं होती, बस एक तकनीकी काम अधूरा रह जाता है, जियो-टैग फोटो अपलोड नहीं हुई।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में पूरा पैसा एक साथ नहीं आता, निर्माण के हर चरण पर एक-एक किस्त आती है। और हर चरण की पुष्टि के लिए घर की एक ऐसी फोटो चाहिए होती है जिसमें GPS लोकेशन और तारीख-समय अपने आप दर्ज हो। यह फोटो न हो, गलत हो, या गलत स्टेज की हो, तो सिस्टम अगली किस्त रोक देता है।
किस्त एक साथ नहीं, तीन हिस्सों में आती है
| किस्त | कब जारी होती है |
|---|---|
| पहली किस्त | सैंक्शन ऑर्डर के बाद, नींव का काम शुरू होने पर |
| दूसरी किस्त | दीवारें उठकर लिंटल स्तर तक पहुंचने पर |
| तीसरी किस्त | छत बनकर घर पूरा होने और निरीक्षण के बाद |
पहली किस्त आमतौर पर सैंक्शन ऑर्डर आने के 7 से 10 कार्य दिवस के अंदर खाते में आ जाती है। इसके बाद का पैसा सीधा इस बात पर निर्भर है कि निर्माण कहां तक पहुंचा और उसका सबूत सिस्टम में सही तरीके से चढ़ा या नहीं।
जियो-टैगिंग है क्या, क्यों ज़रूरी है
जियो-टैगिंग का मतलब है, घर की फोटो ऐसी होनी चाहिए जिसमें उस जगह की GPS कोऑर्डिनेट, यानी सटीक लोकेशन, और फोटो खींचने की तारीख व समय अपने आप जुड़ा हो। यह फोटो AwaasApp या AwaasSoft नाम के सरकारी सिस्टम पर अपलोड होती है। सादा मोबाइल कैमरे से खींची फोटो, जिसमें यह जानकारी नहीं होती, मान्य नहीं होगी।
यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि कोई कागज़ों में झूठा दिखाकर पैसा न ले ले। जब तक सही स्टेज की सही जियो-टैग फोटो सिस्टम में नहीं चढ़ती, अगली किस्त अपने आप रुकी रहती है, चाहे बाकी सब कुछ सही हो।
[INTERNAL-LINK: AwaasApp कैसे डाउनलोड करें और इस्तेमाल करें]
किस्त क्यों अटक जाती है
- लिंटल या छत स्तर की जियो-टैग फोटो अपलोड ही नहीं हुई
- फोटो अपलोड हुई पर गलत चरण की थी, जैसे नींव की जगह लिंटल वाली फोटो चढ़ा दी
- गांव में नेटवर्क की दिक्कत की वजह से फोटो अपलोड अधूरी रह गई
- फोटो में GPS लोकेशन सही रिकॉर्ड नहीं हुई, मोबाइल की लोकेशन सेटिंग बंद थी
- जिस अधिकारी को फोटो अपलोड करनी थी, उसने समय पर नहीं की
बहुत बार लाभार्थी का काम पूरा होता है, पर सिस्टम में उसका सबूत नहीं चढ़ता, और पैसा वहीं अटका रहता है।
किस्त अटकने पर क्या करें
- सबसे पहले pmayg.nic.in पर जाकर अपनी किस्त का स्टेटस चेक करें
- नज़दीकी ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में जाकर पूछें कि जियो-टैग फोटो अपलोड हुई है या नहीं
- अगर फोटो नहीं चढ़ी, संबंधित ग्राम विकास अधिकारी या रोज़गार सहायक से मिलकर फोटो अपलोड कराने के लिए कहें
- अगर काम पूरा हो चुका है फिर भी किस्त नहीं आई, ब्लॉक विकास अधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं
कितना पैसा और किस काम के लिए
| इलाका | कुल सहायता राशि |
|---|---|
| सामान्य मैदानी इलाका | ₹1.20 लाख |
| पहाड़ी, दुर्गम या IAP जिला | ₹1.30 लाख [VERIFY: कुछ जगह यह अमाउंट बढ़कर ₹2 लाख होने की बात भी मिली, पक्का कन्फर्म नहीं हो सका] |
इसके अलावा शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण से अलग से राशि मिलती है, और मनरेगा के तहत मज़दूरी का भी लाभ जोड़ा जा सकता है।
असल में क्या करना चाहिए
अगर निर्माण का कोई भी चरण पूरा हो, उसी दिन या अगले एक-दो दिन में जियो-टैग फोटो अपलोड करवाने की पहल खुद करो, अधिकारी के भरोसे मत बैठो। हर फोटो अपलोड होने के बाद उसकी रसीद या स्क्रीनशॉट अपने पास रख लो, ताकि बाद में विवाद होने पर सबूत रहे। अगर एक महीने से ज़्यादा हो गया और किस्त नहीं आई, चुप मत बैठो, ब्लॉक कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराओ, ज़ुबानी शिकायत अक्सर अनसुनी रह जाती है।
यह जानकारी pmayg.nic.in से जुड़े स्रोतों पर 13 अगस्त 2026 को चेक की गई थी। किस्त और जियो-टैगिंग से जुड़े नियम राज्य और ज़िले के हिसाब से थोड़े अलग हो सकते हैं, अपनी ग्राम पंचायत से एक बार पक्का पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पैसा एक साथ क्यों नहीं आता? निर्माण के हर चरण की पुष्टि होने के बाद ही अगली किस्त जारी होती है, ताकि पैसे का सही इस्तेमाल हो।
जियो-टैग फोटो कौन अपलोड करता है? ज़्यादातर मामलों में ग्राम विकास अधिकारी या रोज़गार सहायक, कुछ जगह लाभार्थी खुद भी ऐप से अपलोड कर सकता है। [VERIFY: यह जगह के हिसाब से अलग हो सकता है]
दूसरी किस्त कब आती है? जब दीवारें उठकर लिंटल स्तर तक पहुंच जाती हैं और उसकी जियो-टैग फोटो सिस्टम में चढ़ जाती है।
किस्त का स्टेटस कैसे चेक करें? pmayg.nic.in पर जाकर या नज़दीकी ग्राम पंचायत कार्यालय में पूछकर।
अगर काम पूरा है फिर भी किस्त नहीं आई तो? ब्लॉक विकास अधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं, सिर्फ मौखिक शिकायत पर निर्भर न रहें।
पहली किस्त कब तक आ जाती है? सैंक्शन ऑर्डर जारी होने के 7 से 10 कार्य दिवस के अंदर।
यह एक जानकारी देने वाला ब्लॉग है, कोई सरकारी वेबसाइट नहीं। हम फॉर्म नहीं भरवाते और इसके लिए किसी से पैसे नहीं लेते। कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से एक बार खुद जानकारी ज़रूर चेक कर लें।





