हिट एंड रन में मुआवजा क्यों अटकता है, सही दस्तावेज़ लिस्ट

On: अगस्त 15, 2026 |
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हिट एंड रन दुर्घटना में मुआवजा अक्सर दस्तावेज़ों की कमी से अटकता है, यहां जानें सही लिस्ट और पूरा प्रोसेस।

FIR भी करा दी, पुलिस थाने के चक्कर भी काट लिए, फिर भी महीनों बाद तक अकाउंट में एक रुपया नहीं आया। यह शिकायत हिट एंड रन के मामलों में सबसे ज़्यादा सुनने को मिलती है। मध्य प्रदेश के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह पैसे की कमी नहीं, कागज़ों की कमी है। सरकार के पास फंड है, नियम भी साफ हैं, पर आधे फॉर्म शुरुआत में ही अटक जाते हैं क्योंकि साथ में सही दस्तावेज़ नहीं लगे होते।

अगर परिवार में किसी की मौत किसी अनजान वाहन की टक्कर से हुई है, या कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है, तो सरकार की तरफ से मुआवजा तय है। मौत की स्थिति में ₹2 लाख, गंभीर चोट में ₹50 हजार। यह पैसा General Insurance Council के ज़रिए सीधे बैंक खाते में आता है। नीचे पूरी जानकारी है कि सही दस्तावेज़ कौन से हैं, ताकि फाइल शुरुआत में ही न फंसे।

कितना मुआवजा मिलता है

यह योजना 2022 में बदली थी, इससे पहले अमाउंट बहुत कम था। कई जगह अब भी पुराना अमाउंट बताया जा रहा है, जो गलत है।

स्थिति31 मार्च 2022 से पहलेअभी
मृत्यु होने पर₹25,000₹2,00,000
गंभीर चोट लगने पर₹12,500₹50,000

एक बात ध्यान रखनी ज़रूरी है। अगर घायल व्यक्ति को Golden Hour स्कीम के तहत पहले ही मुफ्त इलाज मिल चुका है, तो वो अमाउंट इस मुआवजे में से घटा दिया जाता है, बाकी बचा हुआ हिस्सा ही मिलता है।

मुआवजा क्यों अटकता है

मध्य प्रदेश में पिछले पांच साल में साठ हज़ार से ज़्यादा हिट एंड रन मामले दर्ज हुए हैं। अफसरों का कहना है, ज़्यादातर फाइलें दस्तावेज़ों की कमी की वजह से शुरुआत में ही रुक जाती हैं। क्लेम फॉर्म के साथ पुलिस FIR या पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे ज़रूरी कागज़ नहीं लगे होते, और फाइल आगे बढ़ने से पहले ही अटक जाती है।

यह कोई अकेला मामला नहीं। अलग-अलग राज्यों में यही समस्या दोहराई जा रही है, कागज़ पूरे नहीं, फाइल अटकी।

कौन से डॉक्यूमेंट साथ लगाने हैं

  • FIR की कॉपी, दुर्घटना वाले थाने से
  • मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट
  • घायल व्यक्ति के मामले में अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और इलाज के कागज़
  • Form IV, यानी तय फॉर्मेट में एक अंडरटेकिंग
  • आवेदक की पहचान का प्रमाण
  • मृतक से रिश्ते का सबूत, जैसे राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर
  • बैंक खाते की डिटेल, जहां पैसा भेजा जाना है

अगर इनमें से कोई एक कागज़ छूट जाए, फाइल आगे नहीं बढ़ती। हॉस्पिटल से मिलने वाला क्लेम भी साथ लगाना पड़ता है, अगर इलाज हुआ हो।

आवेदन कहां और कब तक करना है

फॉर्म उस उप-मंडल या तहसील के Claims Enquiry Officer के पास जमा करना होता है, जहां दुर्घटना हुई थी। यह आवेदन दुर्घटना के 6 महीने के अंदर करना होता है। [VERIFY: कुछ जगह लिखा है कि यह समय सीमा हालात के हिसाब से 12 महीने तक बढ़ाई जा सकती है, पर यह official टेक्स्ट में साफ नहीं मिला]

आवेदन ऑनलाइन भी और ऑफलाइन भी दिया जा सकता है।

[INTERNAL-LINK: गंभीर चोट यानी grievous hurt की कानूनी परिभाषा]

पैसा कब तक आएगा

Enquiry Officer मामले की जांच करता है और रिपोर्ट Claims Settlement Commissioner को भेजता है। रिपोर्ट सही पाए जाने पर सैंक्शन ऑर्डर जारी होता है। यह ऑर्डर मिलने के बाद General Insurance Council को 15 दिन के अंदर पैसा सीधे बैंक खाते में भेजना होता है। अगर देरी होती है, तो उसकी वजह लिखित में दर्ज करनी पड़ती है, यानी बिना कारण देरी नहीं हो सकती।

स्टेजक्या होता है
आवेदन जमा करनाClaims Enquiry Officer के पास फॉर्म और दस्तावेज़
जांच और रिपोर्टOfficer मामले की पड़ताल करके रिपोर्ट भेजता है
सैंक्शन ऑर्डरClaims Settlement Commissioner मंज़ूरी देता है
पेमेंटसैंक्शन के 15 दिन के अंदर बैंक खाते में

कौन आवेदन कर सकता है

  • मृतक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटा या बेटी
  • गंभीर चोट लगने की स्थिति में घायल व्यक्ति खुद

अगर एक से ज़्यादा लोग दावा करने के हकदार हैं, कानूनी वारिस के तौर पर सबसे नज़दीकी रिश्तेदार आवेदन करता है।

असल में क्या करना चाहिए

अगर परिवार में किसी के साथ ऐसी घटना हुई है, सबसे पहला काम FIR दर्ज कराना है, उसके बिना कहीं आगे नहीं बढ़ोगे। मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेना मत भूलो, यही सबसे ज़्यादा छूटने वाला कागज़ है। फॉर्म जमा करने से पहले हर दस्तावेज़ की एक-एक फोटोकॉपी अपने पास भी रख लो, ताकि दोबारा भागदौड़ न करनी पड़े। अगर 6 महीने बीत भी जाएं, फिर भी कोशिश करना बंद मत करो, संबंधित SDM या तहसील कार्यालय से हालात बताकर आगे की सलाह लो।

यह जानकारी gicouncil.in और teamleaseregtech.com पर 13 अगस्त 2026 को चेक की गई थी। मुआवजे से जुड़े नियम बदल सकते हैं, फॉर्म भरने से पहले संबंधित तहसील कार्यालय से एक बार खुद पुष्टि कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हिट एंड रन में कितना मुआवजा मिलता है? मौत होने पर ₹2 लाख, गंभीर चोट लगने पर ₹50 हज़ार।

मुआवजा अटकने की सबसे बड़ी वजह क्या है? ज़्यादातर मामलों में FIR या पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ फॉर्म के साथ न लगना।

आवेदन कहां जमा करना है? दुर्घटना वाले इलाके के Claims Enquiry Officer, यानी उप-मंडल या तहसील कार्यालय में।

कितने दिन में पैसा आएगा? सैंक्शन ऑर्डर के 15 दिन के अंदर, अगर सारे दस्तावेज़ सही और पूरे हों।

क्या इंश्योरेंस वाली गाड़ी न होने पर भी मुआवजा मिलेगा? हां, यह योजना खासतौर पर उन मामलों के लिए है जहां टक्कर मारने वाला वाहन पहचान में नहीं आता।

क्या यह मुआवजा और अस्पताल का मुफ्त इलाज दोनों साथ मिलेंगे? मिल सकते हैं, पर अगर Golden Hour स्कीम के तहत मुफ्त इलाज पहले हो चुका है, तो उसका खर्चा अंतिम मुआवजे में से घटा दिया जाता है।

यह एक जानकारी देने वाला ब्लॉग है, कोई सरकारी वेबसाइट नहीं। हम फॉर्म नहीं भरवाते और इसके लिए किसी से पैसे नहीं लेते। कोई भी फैसला लेने से पहले संबंधित तहसील या SDM कार्यालय से एक बार खुद जानकारी ज़रूर चेक कर लें।

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